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भारतीय राजनीति में युवाओं की भूमिका

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“भारतीय राजनीति में युवा वर्ग की भूमिका” विषय पर पुस्तक प्रस्तुत करते हुए मुझे अत्यन्त हर्ष हो रहा है। यह पुस्तक मेरे लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति चिंतन के अकादमिक की परिणति है। किसी राष्ट्र की प्रगतिशीलता एवं नैसर्गिक विकास के मानदण्ड को तय करने में युवा शक्ति की महत्त्वपूर्ण भूमिका है, जो सामंजस्यपूर्ण विकास के रास्ते पर राष्ट्र को ले जाने में अपनी अहम जिम्मेदारी निभाती हैं। जिस राष्ट्र में युवावर्ग के विचार, सोच, चिंतन और पुरुषार्थ राष्ट्रहित और सतत मानवीय विकास के लक्ष्यों के अनुरूप होते हैं, वह राष्ट्र कभी सुषुप्तावस्था में नहीं रहता। वह निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहता है। वर्तमान दौर में भी युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक एवं नागरिक आंदोलनों के साथ युवा सदैव गतिविधियों के केंद्र में रहे हैं क्योंकि उनके भीतर लगातार बदलने वाले सामाजिक ढांचे के अनुकूल ढल जाने की नैसर्गिक क्षमता होती है। इस प्रकार राष्ट्र निर्माण सिर्फ राजनीतिज्ञों या नीति निर्धारकों का कार्य नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जागृति और युवा शक्ति की सामर्थ्य है, जो भूमि के एक हिस्से को सशक्त राष्ट्र के रूप में खडा करता है। यह एक ऐसा परिवर्तन है जो युवाओं के बिना संभव नहीं है। भारतीय राजनीति में युवा शक्ति का मौजूदा परिदृश्य अत्यंत उत्साहवर्धक है। मौजूदा दौर में भारत न सिर्फ वैश्विक स्तर पर युवा शक्ति के रूप में उभर रहा है, बल्कि राजनीति में भी भारतीय युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर लोकतंत्र को समृद्ध कर रहे हैं। ऊर्जा से लबरेज अनेक युवा विभिन्न राजनीतिक दलों में अच्छे नेतृत्वकर्ता के रूप में नजर आ रहे हैं। स्फूर्ति एवं नई सोच के साथ ये भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं तथा इन्होंने अपने नेतृत्व एवं कार्यों से प्रभावी छाप छोड़ी है। युवाओं का राजनीति में आना इस लिहाल से महत्वपूर्ण है कि उन्होंने राजनीति के परपंरागत मुहावरे को प्रभावित किया है। उन्होंने बता दिया है कि जो भी अच्छा कार्य करेगा, युवा उसी के साथ रहेंगे। युवाओं का उद्देश्य राजनीति में भूमिका को अधिक प्रभावी और सकारात्मक बना कर राजनीति में पूर्व स्थापित समस्याओं का निराकरण करना है और राजनीति को पारदर्शी, संवेदनशील और जन हितैषी बनाना है। समय के साथ जैसे-जैसे राजनीति का स्वरूप और परिदृश्य बदल रहा है, वैसे-वैसे युवाओं की राजनीति में भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाने लगा है। राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। राजस्थान की राजनीति में युवा भागीदारी निरंतर बढ़ रही है और भविष्य में इसके निरंतर उत्कर्ष होने की प्रबल संभावनाएं हैं। वर्तमान में चुनाव को लेकर नया रुख यह भी देखने में आया है कि बुजुर्ग स्वयं चुनाव में उतरने के बजाय अब परिवार के शिक्षित युवाओं को तवज्जो दे रहे हैं। निहितार्थ के रूप में कई ऐसे युवा चेहरे हमारे समक्ष हैं जिनके कारण राजस्थान की राजनीति युवा वर्ग पर केंद्रित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी का परिणाम है कि नेतृत्व और मतदाता के रूप में युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए प्रत्येक राजनीतिक दल लगातार प्रयास कर रहा है एवं युवाओं के हित में अपनी नीतियों को बनाकर उन निर्णयों को क्रियान्वित कर रहे हैं। वर्तमान राजनीति में किंगमेकर के रूप में युवा जनप्रतिनिधियों ने परंपरागत राजनीति के स्थान राजनीति में शुचिता, पारदर्शिता और युवाकेन्द्रित शासन की संकल्पना लाने पर बल दिया है और इसके लिए वे सतत रूप से प्रयासरत हैं, जबकि चेंजमेकर के रूप में उन्होंने परंपरागत राजनीति को मूल्यों की राजनीति में परिवर्तित कर एक नए बदलाव की शुरुआत की है।

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